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घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

अमेरिका ने गोरक्षा समूहों को आतंकी बताया और मोदी सरकार को नाकारा बताया

वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी अमेरिका की एक आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में साल 2016 में आतंकी गोरक्षा समूहों द्वारा हिंसा किए जाने की घटनाएं बढ़ गईं। रिपोर्ट मं यह कहा गया है कि ज्यादातर घटनाएं मुसलमानों के खिलाफ ही हुईं है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आतंकी गोरक्षकों के खिलाफ भारत में प्रशासन कानूनी कार्रवाई करने में विफल रहा है। ट्रंप प्रशासन की पहली बार यह रिपोर्ट आई है। इसे विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक संगठनों के लोगों ने यह चिंता जताई है कि भाजपा सरकार के तहत धार्मिक अल्पसंख्यक बहुत ही कमजोर महसूस करते हैं क्योंकि कट्टरपंथी हिंदूवादी समूह गैर हिंदुओं और उनके धर्म स्थलों के खिलाफ हिंसा कर रहे हैं।  अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘ऐसी रिपोर्ट हैं कि धार्मिक रूप से प्रेरित हत्याएं की गईं, हमले किए गए, दंगे किए गए, भेदभाव और तोड़फोड़ की गई तथा लोगों को धार्मिक आस्था पर अमल करने से रोकने की कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में कहा गया है  कि आतंकी  गोरक्षा समूहों द्वारा हत्याएं कि...

आजादी के आंदोलन में दारुल उलूम देवबंद का योगदान - तहरीक रेशमी रुमाल आंदोलन

देवबंद (सहारनपुर)। देश की आजादी की लड़ाई में विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक संस्था दारुल उलूम देवबंद ने भी अहम भूमिका निभाई। दारुल उलूम के छात्र मौलाना महमूदुल हसन ने रेशमी रुमाल तहरीक चलाकर आजादी की लड़ाई को नई धार दी। इस आंदोलन में आजादी के मतवाले फिरंगियों की नजर से बचाकर गुप्ता योजनाओं का संदेश रेशमी रुमाल पर लिखकर आदान-प्रदान करते थे। देश को स्वतंत्र कराने में दारुल उलूम के उलेमा ने जो कुर्बानियां दीं उसको शायद ही कभी भुलाया जा सके। शेखुल हिंद की इन्हीं खिदमात को देखते हुए भारत सरकार द्वारा उनकी तहरीक पर डाक टिकट भी जारी किया गया। आजादी की लड़ाई को नई दिशा व दशा देने वाले मौलाना महमूदुल हसन का जन्म देवबंद के एक इल्मी खानदान में हुआ था। वर्ष 1905 में दारुल उलूम की बागडोर संभालने वाले हसन उन स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिन्हें उनकी कलम, ज्ञान, आचार व व्यवहार आदि विशेषताओं के बूते शेखुल हिद (भारतीय विद्वान) की उपाधि से विभूषित किया गया। मौलाना शेखुल हिद ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए रेशमी रुमाल आदोलन चलाया जो कि भारत को आजाद कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाया गया पहला आद...

यमन में सऊदी के कारण 11250 से अधिक लोग मारे गए

प्राप्त जानकारी के अनुसार यमन स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि सऊदी अरब की नाकाबंदी तथा सनआ एयरपोर्ट को बंद करने के कारण देश में ११००० से अधिक रोगी इलाज के आभाव में जान की बाज़ी हार गए है । स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश से बाहर निकलने पर प्रतिबंध तथा इलाज के अभाव के कारण देश में ११२५० से अधिक लोग मारे गए है । स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार हर साल १०० से अधिक लोगों को इलाज के लिए विदेश जाने की आवश्यकता है लेकिन देश की नाकाबंदी तथा सऊदी अतिक्रमण के कारण यह संभव नहीं हो पाता । सनआ एयरपोर्ट को जल्द ही खोलना होगा हर गुज़रता दिन यमन में ३२० से अधिक मौतों का कारण बन रहा है । सऊदी अरब, यमन पर अतिक्रमण तथा सनआ एयरपोर्ट को बंद कर यमन में गंभीर मानव अपराध को बढ़ावा दे रहा है । स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल हकीम ने विश्व जगत से अपील की है कि वह शीघ्र ही सनआ एयरपोर्ट को खुलवाए , मानव इतिहास में किसी देश की ३० मिलियन जनता को यात्रा से वंचित करने वाले अपराध की कोई मिसाल नहीं मिलती ।

जबरन हिजाब उतरवाने पर 85 हजार डॉलर का मुआवजा मिला

कैलिफॉर्निया अमेरिका में एक मुस्लिम महिला ने पुलिस द्वारा जबरन हिजाब उतरवाने पर 85 हजार डॉलर (लगभग 54 लाख रुपये) का मुआवजा हासिल किया है। पुलिस ने कस्टडी के दौरान महिला का जबरन हिजाब उतरवाया था। मुकदमे के अनुसार यह घटना पिछले साल की है जब किर्स्टी पॉवेल और उनके पति को पुलिस ने कस्टमाइज्ड 'लो राइडर' कार चलाने के जुर्म में पकड़ा था। सीएनएन के मुताबिक पुलिस को पॉवेल के खिलाफ एक वॉरंट मिला, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था। पॉवेल के पति ने एक महिला अधिकारी से गिरफ्तारी देखने का अनुरोध किया, लेकिन गिरफ्तार करने वाले अधिकारी ने यह अनुरोध ठुकराते हुए पॉवेल को हिजाब हटाने को कहा। पॉवेल को बिना हिजाब के जेल में पूरी रात काटनी पड़ी। पॉवेल के पति के बॉन्ड भरने के बाद महिला को हिजाब वापस किया गया। पॉवेल ने अप्रैल, 2016 में मुकदमा दाखिल किया था। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ। पॉवेल को बिना हिजाब के फोटो खिंचवाने के लिए बाध्य किया गया था। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें असुविधा हुई और उन्हें अपमान भी सहना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी व्यक्तिगत ...

इस्लाम आतंक नहीं आदर्श है - स्वामी लक्ष्मी शंकाराचार्य

स्वामी लक्ष्मी शंकाराचार्यः   कई साल पहले दैनिक जागरण में श्री बलराज बोधक का लेख ' दंगे क्यों होते हैं?' पढ़ा, इस लेख में हिन्दू-मुस्लिम दंगा होने का कारण क़ुरआन मजीद में काफिरों से लड़ने के लिए अल्लाह के फ़रमान बताये गए थे.लेख में क़ुरआन मजीद की वह आयतें भी दी गयी थीं. इसके बाद दिल्ली से प्रकाशित एक पैम्फलेट ( पर्चा ) ' क़ुरआन की चौबीस आयतें, जो अन्य धर्मावलम्बियों से झगड़ा करने का आदेश देती हैं.' किसी व्यक्ति ने मुझे दिया. इसे पढने के बाद मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि में क़ुरआन पढूं. इस्लामी पुस्तकों कि दुकान में क़ुरआन का हिंदी अनुवाद मुझे मिला. क़ुरआन मजीद के इस हिंदी अनुवाद में वे सभी आयतें मिलीं, जो पैम्फलेट में लिखी थीं. इससे मेरे मन में यह गलत धारणा बनी कि इतिहास में हिन्दू राजाओं व मुस्लिम बादशाहों के बीच जंग में हुई मार-काट तथा आज के दंगों और आतंकवाद का कारण इस्लाम है. दिमाग भ्रमित हो चुका था.इस भ्रमित दिमाग से हर आतंकवादी घटना मुझे इस्लाम से जुड़ती दिखाई देने लगी. इस्लाम, इतिहास और आज कि घटनाओं को जोड़ते हुए मैंने एक पुस्तक लिख डाली ' इस्लामिक आतंकवा...

वाजिब नमाज़े आयात पढने का तरीका पढ़े !

1516। नमाज़े आयात की दो रकअतें हैं और हर रकअत में पाँच रुकूअ हैं। इस के पढ़ने का तरीक़ा यह है कि नियत करने के बाद इंसान तकबीर कहे और एक दफ़ा अलहम्द और एक पूरा सूरह पढ़े और रुकूअ में जाए और फिर रुकूअ से सर उठाए फिर दोबारा एक दफ़ा अलहम्द और एक सूरह पढ़े और फिर रुकूअ में जाए। इस अमल को पांच दफ़ा अंजाम दे और पांचवें रुकूअ से क़्याम की हालत में आने के बाद दो सज्दे बजा लाए और फिर उठ खड़ा हो और पहली रकअत की तरह दूसरी रकअत बजा लाए और तशह्हुद और सलाम पढ़ कर नमाज़ तमाम करे। 1517। नमाज़े आयात में यह भी मुम्किन है कि इंसान नियत करने और तकबीर और अलहम्द पढ़ने के बाद एक सूरह की आयतों के पांच हिस्से करे और एक आयत या उस से कुछ ज़्यादा पढ़े और बल्कि एक आयत से कम भी पढ़ सकता है लेकिन एहतियात की बिना पर ज़रुरी है कि मुकम्मल जुमला हो और उस के बाद रुकूअ में जाए और फिर खड़ा हो जाए और अलहम्द पढ़े बग़ैर उसी सूरह का दूसरा हिस्सा पढ़े और रुकूअ में जाए और इसी तरह इस अमल को दोहराता रहे यहां तक कि पांचवें रुकूअ से पहले सूरे को ख़त्म कर दे मसलन सूरए फ़लक़ में पहले बिसमिल्ला हिर्रहमानिर्रहीम। क़ुल अऊज़ू बिरब्बिलफ़लक़। पढ़े और रुकूअ में जाए ...

26 शिया शहीद,आले सऊद के कारिंदे सड़कों पर पड़े शहीदों के जनाज़े भी उठाने नहीं दे रहे हैं।

अल-अवामिया निवासियों ने खबर दी है कि इस शहर की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है चूंकि सऊदी सैनिकों के हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है। सऊदी शिया बहुल क्षेत्र अल-अवामिया में सऊदी सेना के हमले लगातार तीन महीने से जारी हैं।  जिसमें अब तक 26 लोग सऊदी अधिकारियों के हाथों शहीद हो चुके हैं। कुछ सूत्रों का कहना है कि इस शहर की स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि आले सऊद के कारिंदे सड़कों पर पड़े शहीदों के जनाज़े भी उठाने नहीं दे रहे हैं।  आले सऊद ने घरों की छतों पर स्नाइपर शूटर तैनात कर रखे हैं तथा मज़लूमों तक कोई सहायता नहीं पहुँचने दे रहे हैं। अल-अवामिया में बड़ी मुश्किलों के बाद अपने घर से निकलने में सफल होने वाली एक महिला का कहना है कि इन क्षेत्रों में पिछले तीन दिन से खाने के लिए कुछ नहीं है। सोशल मीडिया पर अलअवामिया की हालि और सऊदी हमलों से पहले की तस्वीरें भी शेयर हो रही हैं जिनमें स्पष्ट अंतर को महसूस किया जा सकता है। इस्लाम आतंक नहीं आदर्श है - स्वामी लक्ष्मी शंकाराचार्य   आले सऊद के अत्याचार से परेशान अब तक सैकड़ों लोग आसपास के गांवों में ...