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घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार को रोकने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालने की तैयारी में जुटा ईरान


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इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने कहा है कि इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देश के राष्ट्राध्यक्ष, रोहिंग्या पलायनकर्ताओं की सहायता की आवश्यकता तथा मुसलमानों के जनसंहार को रुकवाने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालने पर एकमत हैं।
डाक्टर हसन रूहानी क़िरक़िज़िस्तान की राजधानी आस्ताना में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में ओआईसी के शिखर सम्मेलन तथा रोहिंग्या मुसलमानों की समीक्षा के लिए आयोजित विशेष बैठक में भाग लेने के बाद स्वदेश लौट आए।
उन्होंने तेहरान हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार को रोकने के लिए म्यांमार सरकार पर दबाव डालने के बारे में इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष एकमत हैं। उन्होंने कहा कि क़ज़ाक़िस्तान, तुर्की, आज़रबाइजान गणराज्य और उज़बेकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों से द्विपक्षीय मुलाक़ात में अत्याचार ग्रस्त रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति पर इस्लामी जगत के गंभीर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
इससे पहले डाक्टर हसन रूहानी और तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति को बहुत ही खेदजनक और दुखद बताते हुए इस्लामी जगत के मध्य प्रभावी कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया था।
डाक्टरर हसन रूहानी ने इस अवसर पर कहा कि म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को बहुत बड़ी त्रासदी का सामना है जिसे त्वरित रोकने की आवश्यकता है। ईरान के राष्ट्रपति ने इस्लामी देशों के प्रमुखों पर बल दिया है कि वह प्रभावित रोहिंग्या मुसलमानों और शरणार्थियों के मामले को त्वरित हले करने के लिए मिलकर प्रयास करें।
ईरान के उप विदेशमंत्री ने कहा था कि रोहिंग्या मुसलमानों के लिए सहायता सामग्री तैयार है और तेहरान रोहिंग्या मुसलमानों के लिए नई संभावनाएं प्रशस्त करने का प्रयास कर रहा है।
उप विदेशमंत्री इब्राहीम रहीमपूर ने गुरुवार की रात कहा था कि विदेशमंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम एक पत्र तैयार किया है ताकि इस विषय को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में पेश किया जाए।
ज्ञात रहे कि हालिया दिनों में म्यांमार की सेना की ओर से रोहिंग्या मुसलमानों के विरुद्ध की गई हिंसक कार्यवाही में कम से कम 400 रोहिंग्या मुसलमान मारे जा चुके हैं जबकि हज़ारों की संख्या में बेघर हो गए। (AK)
       

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