Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

आतंकवाद के सबसे बड़े समर्थक अमरीका, और सऊदी अरब

जुलाई १५, २०१६। तेहरान के जुमे के इमाम ने अमरीका, सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन को दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक बताया है।
तेहरान में जुमे की नमाज़ के विशेष भाषण में आयतुल्लाह मोहम्मद इमामी काशानी ने, क्षेत्र के कुछ देशों के संकटमय हालात और इन देशों में बेगुनाह लोगों के जनसंहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इराक़, सीरिया और यमन जैसे देशों में जनता को ख़त्म करने और इन देशों की मूल संरचनाओं को ध्वस्त करने के लि,ए आतंकवादी गुटों को जन्म दिया गया है जो मानवता के ख़िलाफ़ खुला अपराध है।

उन्होंने कहा कि अमरीका ऐसी हालत में दुनिया में मानवाधिकार के समर्थन का दावा करता है कि इराक़, सीरिया और यमन के पीड़ित राष्ट्र के दुश्मनों का यथावत समर्थन कर रहा है और इन देशों में तकफ़ीरियों व वहाबियों के अपराध पर चुप बैठा है।

आयतुल्लाह इमामी काशानी ने फ़िलिस्तीन में ज़ायोनी शासन के अतिग्रहण व अपराध की ओर इशारा करते हए कहा कि अमरीका और उसके कुछ पश्चिमी घटक, ऐसी स्थिति में फ़िलिस्तीनियों पर आतंकी होने का आरोप लगा रहे हैं जब वे अपनी भूमि की रक्षा व प्रतिरोध के सिवा कुछ नहीं कर रहे हैं।
तेहरान के अस्थायी जुमे के इमाम ने इसी प्रकार यमनी जनता की संकटमय स्थिति और इस देश पर आले सऊद शासन के 1 साल से ज़्यादा समय से जारी अतिक्रमण की भर्त्सना करते हुए कहा कि यमन पर यमनी जनता का अधिकार है और किसी को यमनी राष्ट्र के भविष्य के संबंध में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कुछ पश्चिमी अधिकारियों की ओर से ईरान पर आतंकवाद के समर्थन के आरोप की ओर इशारा करते हए, कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि आतंकवादी गुट दाइश अमरीका की ताक़त, आले सऊद शासन के पैसों और ज़ायोनियों की नीति से संचालित हो रहा है।
आयतुल्लाम इमामी काशानी ने उम्मीद जतायी कि क्षेत्रीय व इस्लामी देशों ख़ास तौर पर बहरैन, इराक़, सीरिया और यमन में शांति व सुरक्षा लौट आएगी।

Comments

Popular posts from this blog

"विश्व अली असग़र दिवस" मोहर्रम की पहली तारीख़ मनाया जाएगा

"अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष 22 सितम्बर शुक्रवार को 41 देशों में एक साथ मनाया जाएगा। "अली असग़र विश्व दिवस" कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था के अध्यक्ष दाऊद मनाफ़ी ने एक प्रेसवार्ता में बताया है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) के 6 महीने के दूध पीते बेटे हज़रत अली असग़र (अ) की याद में आयोजित होने वाले "अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की पहली तारीख़ अर्थात 22 सितम्बर शुक्रवार को ईरान सहित दुनिया के 41 देशों में मनाया जाएगा।   संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि अली असग़र विश्व दिवस के अवसर पर ईरान से छोटे बच्चों के पहनने के लिए तैयार सफ़ेद और हरे रंग के लगभग एक लाख कपड़े दुनिया के 41 देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया हज़रत अली असग़र के नाम से "अली असग़र विश्व दिवस" का आयोजन करने वाली उनकी संस्था ने दुनिया की आठ भाषाओं जिनमें, अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, रूसी, आज़री, तुर्की इस्तांबूली, स्वाहिली और  हौसा भाषा हैं। इस संस्था ने एक किताब भी प्रकाशित की है जिसके द्वारा दुनियाभर के लोगों तक इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ...

4 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via -  Mr Ali Haider

3 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via Syed Haider Ali Molai

अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का अपमान करना जायज़ नहीं है - शिया सुन्नी एकता

वैसे तो इस्लाम हर धर्म का आदर करने का आदेश देता है  किसी दुसरे धर्मों (ग़ैर इस्लामी) के प्रतीकों का अपमान करना भी  इस्लाम में वर्विज (मना) है पर कुछ लोग एक दुसरे (अपने इस्लाम) के फिरके के लोगों का अपमान करने की सोचते हैं जो की यह इस्लामी शिक्षा के विपरीत है। दरअसल ऐसे लोग इस्लाम के दुश्मन होते हैं जो इस्लाम के दुश्मनों के हाथ मजबूत करते हैं। अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है और जाहिर है कि जो कोई भी शिया के नाम पर अहले सुन्नत के मुक़द्देसात का अपमान करता है चाहे वो  सुन्नी  होकर शिया मुक़द्देसात का अपमान करता है वह इस्लाम का दुश्मन है। क्या अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का  अपमान जैसे खुलुफा  और अहले सुन्नत के कुछ मनपसंद सहाबा  के नाम अशोभनीय तरीके से लेना   जायज़ (वेध) है? दुनिया भर के  शिया धार्मिक केन्द्रों (ईरान और इराक) के ओलामाओ (विद्वानों)  ने फतवा दिया है की अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है अधिक जानकारी के लिए मैं यहाँ 1...

عزاداری صرف ماتم داری کا نام نہیں ہے بلکہ انسانیت کے پرچم کو بلند کرنے کا نام عزاداری ہے - عظمت عابدی

  आजादारी सिर्फ मातम का नाम नहीं, इंसानियत का झंडा फहराना ही आजादारी है

ईरान के अज़ादारो के कुछ अनोखे चित्र

Join Us :Live All Over World 's Azadari.Com

‘गोवा में नहीं होगी गोमांस की कमी’ मनोहर पर्रिकर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बीफ की कमी न हो, इससे निपटने के लिए सरकार ने कर्नाटक से इसे आयात करने का विकल्प खुला रखा है। पर्रिकर ने गोवा विधानसभा में कहा, "हमने (कर्नाटक में) बेलगाम से मांस आयात करने का विकल्प बंद नहीं किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां कोई कमी नहीं हो।" पर्रिकर ने यह जवाब भाजपा विधायक नीलेश कबराल के एक सवाल पर दिया। उन्होंने कहा, "मैं आपको भरोसा दे सकता हूं कि पड़ोसी राज्य से आने वाले बीफ की जांच उचित तरीके से और अधिकृत चिकित्सक द्वारा की जाएगी।" पर्रिकर ने यह भी कहा कि यहां से करीब 40 किलोमीटर दूर पोंडा स्थित गोवा मीट कांप्लेक्स में राज्य के एकमात्र वैध बूचड़खाने में रोजाना लगभग 2,000 किलोग्राम बीफ तैयार होता है। उन्होंने कहा, "बाकी के बीफ की आपूर्ति कनार्टक से होती है। सरकार की गोवा मीट कांप्लेक्स में वध के लिए पड़ोसी राज्यों से जानवरों को लाए जाने पर रोक लगाने की कोई मंशा नहीं है।" राज्य के पर्यटन वाले इलाकों में और अल्पसंख्यक समुदाय में बीफ खाया जाता है, जो राज्य की कुल आबा...

शहादत : हज़रत इमाम बाकिर और इस्लाम मे सिक्के की ईजाद

 हज़रत इमाम मौहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम पहली रजब 57 हिजरी को जुमा के दिन मदीनाऐ मुनव्वरा मे पैदा हुऐ। अल्लामा मजलिसी लिखते है कि जब आप बत्ने मादर मे तशरीफ लाऐ तो आबाओ अजदाद की तरह घर मे गैब की आवाज़े आने लगी और जब नो महीने पूरे हुऐ तो फरीश्तो की बेइंतेहा आवाज़े आने लगी और शबे विलादत एक नूर जाहिर हुआ और आपने विलादत के बाद आसमान का रूख किया और (हजरत आदम की तरह) तीन बार छींके और खुदा की हम्द बजा लाऐ, पूरे एक दिन और रात आपके हाथ से नूर निकलता रहा। आप खतना शुदा, नाफ बुरीदा और तमाम गंदगीयो से पाक पैदा हुऐ। (जिलाउल उयून पेज न. 259-260) नाम, लक़ब और कुन्नीयत सरवरे कायनात रसूले खुदा (स.अ.व.व) और लोहे महफूज़ के मुताबिक आपका नाम मौहम्मद था और आपकी कुन्नीयत अबुजाफर थी और आपके बहुत सारे लक़ब थे कि जिन मे बाक़िर, शाकिर, हादी ज़्यादा मशहूर है। (शवाहेदुन नबुवत पेज न. 181) लक़बे बाक़िर की वजह बाक़िर बकरः से निकला है और इसका मतलब फैलाने वाला या शक़ करने देने वाला है। (अलमुनजिद पेज न. 41) इमाम बाक़िर को बाक़िर इस लिऐ कहा जाता है कि आपने उलूम को लोगो के सामने पेश किया और...