Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

चीन में 16,000 मस्जिदों को ध्वस्त या क्षतिग्रस्त कर दिया है

 ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (एएसपीआई) की रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन के उत्तर पश्चिम में स्थित शिनजियांग प्रांत में 16,000 मस्जिदों को ध्वस्त या क्षतिग्रस्त कर दिया है, यह संख्या कुल मस्जिदों की 65 फ़ीसद है।



एएसपीआई ने दावा किया है कि उसके पास सैटेलाइट इमेजिज़ और दस्तावेज़ हैं, जिनके आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

अधिकांश मस्जिदों को पिछले तीन वर्षों के दौरान, तोड़ा गया है। एक अनुमान के मुताबिक़, 8,500 मस्जिदों को पूर्ण रूप से ध्वस्त कर दिया गया है।

अकसर मस्जिदों को उरूमक़ी और काशगर के शहरी इलाक़ों में तोड़ा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक़, जिन मस्जिदों को ध्वस्त नहीं किया गया है, उनके गुबंदों और मीनारों को तोड़ दिया गया है। एक अनुमान है कि शिनजियांग में ऐसी 15,500 मस्जिदे हैं, जिनका स्वरूप बदल दिया गया है।

अगर यह आंकड़ें सही हैं, तो 1960 के बाद से इस इलाक़े में मस्जिदों की संख्या सबसे कम होगी।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि शिनजियांग स्थित बौद्ध मंदिरों और चर्चों को नहीं तोड़ा गया है।

एएसपीआई का कहना है कि चीन, शिनजियांग की स्थानीय सांस्कृतिक धरोहर को मिटाने की कोशिश कर रहा है, इसी के साथ ऑस्ट्रेलियन थिंक टैंक ने इस स्थिति पर विश्व समुदाय की चुप्पी की कड़ी आलोचना की है।

शिनजियांग क्षेत्र में चीन के इस अभियान की जड़ें 1940 के दशक से जाकर मिलती हैं, जब वीगर मुस्लिम बहुल इलाक़े का चीन में विलय किया गया। लेकिन हालिया वर्षों में इस इलाक़े में नमाज़ पढ़ने, रोज़ा रखने, दाढ़ी बढ़ाने या हिजाब पहनने पर प्रतिबंधों में तेज़ी आई है।

चीनी अधिकारियों का दावा है कि धार्मिक प्रतीकों से कट्टरवाद की झलक आती है, इसीलिए आतंकवादवाद से मुक़ाबले के नाम पर चीन अपनी कार्यवाही को सही ठहराता है।

पिछले साल एएफ़पी ने अपनी एक जांच में दावा किया था कि इस क्षेत्र में दर्जनों कब्रिस्तानों को नष्ट कर दिया है।

जून में एपी की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन, वीगर मुसलमानों की आबादी को जबरन नियंत्रित कर रहा है।

हालांकि चीन ने इन रिपोर्टों को मनगढ़ंत बताया है और कहा है कि शिनजियांग में मुसलमानों को पूरी तरह से धार्मिक आज़ादी हासिल है। एएसपीआई की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो चीन के विदेश मंत्रालय का कहना था कि ऑस्ट्रेलियन थिंक टैंक की कोई शैक्षणिक विश्वसनीयता नहीं है, और वह चीन विरोधी रिपोर्टें गढ़ रहा है

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन का कहना था कि क्षेत्र में 24,000 मस्जिदे हैं, और यह संख्या अमरीका से 10 गुना ज़्यादा है।



Comments

Popular posts from this blog

चुगली,ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना। इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है

ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है। पीठ पीछे बुराई की परिभाषा में कहा गया है पीठ पीछे बुराई करने का मतलब यह है कि किसी की अनुपस्थिति में उसकी बुराई किसी दूसरे इंसान से की जाए कुछ इस तरह से कि अगर वह इंसान ख़ुद सुने तो उसे दुख हो। पैगम्बरे इस्लाम स.अ ने पीठ पीछे बुराई करने की परिभाषा करते हुए कहा है कि पीठ पीछे बुराई करना यह है कि अपने भाई को इस तरह से याद करो जो उसे नापसन्द हो। लोगों ने पूछाः अगर कही गयी बुराई सचमुच उस इंसान में पाई जाती हो तो भी वह ग़ीबत है? तो पैगम्बरे इस्लाम ने फरमाया कि जो तुम उसके बारे में कह रहे हो अगर वह उसमें है तो यह ग़ीबत है और अगर वह बुराई उसमें न हो तो फिर तुमने उस पर आरोप लगाया है।यहां पर यह सवाल उठता है कि इंसान किसी की पीठ पीछे बुराई क्यों करता है?  पीठ पीछे बुराई के कई कारण हो सकते हैं। कभी जलन, पीठ पीछे बुराई का कारण बनती है। जबकि इंसान को किसी दूसरे की स्थिति से ...

Purpose OF Azadari- Moharram 2021

 

4 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via -  Mr Ali Haider

सहीफ़ए सज्जादिया में रमज़ानुल मुबारक की श्रेष्ठता = आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयानात की रौशनी में,

सहीफ़ए सज्जादिया में रमज़ानुल मुबारक की श्रेष्ठता सहीफ़ए सज्जादिया की दुआ 44 में रमज़ानुल मुबारक के बारे में इमाम सज्जाद अ. नें कुछ बातें की हैं आज उन्हीं को आपके सामने बयान करना चाहता हूँ हालांकि यहाँ अपने प्रिय जवानों से यह भी कहना चाहता हूं कि कि सहीफ़ए कि सहीफ़ए सज्जादिया को पढ़ें, इसका अनुवाद पढ़ें, यह हैं तो दुआएं लेकिन इनमें ज्ञान विज्ञान का एक समन्दर है। सहीफ़ए सज्जादिया की सभी दुआओं में और इस दुआ में भी ऐसा लगता है कि एक इन्सान ख़ुदा के सामने बैठा लॉजिकल तरीक़े से कुछ बातें कर रहा है, बस अन्तर यह है कि उसकी शक्ल दुआ है। उसका महीना दुआ के शुरू में इमाम फ़रमाते हैं ’’أَلحمَدُلِلَّهِ الَّذِى جَعَلَنَا مِن أَهلِهِ‘‘ ख़ुदा का शुक्र कि उसनें हमें अपनी हम्द (प्रशंसा) करने की तौफ़ीक़ (शुभ अवसर) दी। हम उसकी नेमतों को भूले नहीं हैं और उसकी हम्द और शुक्र करते हैं। उसनें हमारे लिये वह रास्ते खोले हैं जिनके द्वारा हम उसकी हम्द कर सकें और उन रास्तों पर चल सकें। फिर फ़रमाते हैं- ’’ وَالحَمدُلِلَّهِ الَّذِى جَعَلَ مِن تِلكَ السُّبُلُ شَهرِهِ شَهرَ رَمَضَان‘‘ हम्द और तारीफ़ उ...

मोदी सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों को रोहिंग्या मुसलमानों की एंट्री न होने के लिए दिया निर्देश

मोदी सरकार के रोहिंग्या मुसलमानों पर शिकंजा कसने के साथ केंद्रीय एजेंसियों को भारत में रोहिंग्या के प्रवेश के सभी संभावित रास्तों की पहचान करने और उन पर रोक लगाने के लिए अधिकतम इंतजाम करने को कहा गया है। याद रहे म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ अत्याचार के चलते लोग पलायन कर अपनी जाने बचाने के लिए भारत आते हैं पर मोदी सरकार मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को कोई महत्व नहीं दे रही है  लगता ऐसा है के ट्रम्प को खुश करने के लिए यह सब किया जा रहा है 

नियोग प्रथा पर मौन, हलाला 3 तलाक पर आपत्ति ? एक बार जरुर पढ़े

3 तलाक एवं हलाला पर आपत्ति जताने वाले आखिर नियोग प्रथा पर खामोश क्यों हैं, हलाला ठीक है या ग़लत कम से कम विवाहित महिला शारीरिक संबंध अपने पति से ही बनाती है! पर नियोग प्रथा से संतान सुख के लिए किसी भी ब्राह्मण पुरुष से नियोग प्रथा के अनुसार उससे शारीरिक संबंध बना सकती है! यह कितना बड़ा अत्याचार और पाप हुआ? नियोग प्रथा क्या है? हिन्दू धर्म में एक रस्म है जिसे नियोग कहते है , इस प्रथा के अनुसार किसी विवाहित महिला को बच्चे पैदा न हो रहे हो तो वो किसी भी ब्राह्मण पुरुष से नियोग प्रथा के अनुसार उससे शारीरिक संबंध बना सकती है! नियोग प्रथा के नियम हैं:- १. कोई भी महिला इस प्रथा का पालन केवल संतान प्राप्ति के लिए करेगी न कि आनंद के लिए। २. नियुक्त पुरुष केवल धर्म के पालन के लिए इस प्रथा को निभाएगा। उसका धर्म यही होगा कि वह उस औरत को संतान प्राप्ति करने में मदद कर रहा है। ३. इस प्रथा से जन्मा बच्चा वैध होगा और विधिक रूप से बच्चा पति-पत्नी का होगा , नियुक्त व्यक्ति का नहीं। ४. नियुक्त पुरुष उस बच्चे के पिता होने का अधिकार नहीं मांगेगा और भविष्य में बच्चे से कोई रिश्ता नहीं रखेगा। ...

अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का अपमान करना जायज़ नहीं है - शिया सुन्नी एकता

वैसे तो इस्लाम हर धर्म का आदर करने का आदेश देता है  किसी दुसरे धर्मों (ग़ैर इस्लामी) के प्रतीकों का अपमान करना भी  इस्लाम में वर्विज (मना) है पर कुछ लोग एक दुसरे (अपने इस्लाम) के फिरके के लोगों का अपमान करने की सोचते हैं जो की यह इस्लामी शिक्षा के विपरीत है। दरअसल ऐसे लोग इस्लाम के दुश्मन होते हैं जो इस्लाम के दुश्मनों के हाथ मजबूत करते हैं। अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है और जाहिर है कि जो कोई भी शिया के नाम पर अहले सुन्नत के मुक़द्देसात का अपमान करता है चाहे वो  सुन्नी  होकर शिया मुक़द्देसात का अपमान करता है वह इस्लाम का दुश्मन है। क्या अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का  अपमान जैसे खुलुफा  और अहले सुन्नत के कुछ मनपसंद सहाबा  के नाम अशोभनीय तरीके से लेना   जायज़ (वेध) है? दुनिया भर के  शिया धार्मिक केन्द्रों (ईरान और इराक) के ओलामाओ (विद्वानों)  ने फतवा दिया है की अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है अधिक जानकारी के लिए मैं यहाँ 1...

रूसी न्यूज़ एजेन्सी का कहना है की अमरीका नहीं, ईरान अपनी इन शर्तों पर परमाणु समझौते करेगा

  जो बाइडन के कुछ सलाहाकर यहां तक कि खुद वह भी ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते में वापसी की बात करते हैं लकिन उसके लिए कुछ शर्तें पेश करते हैं, कुछ युरोपीय देशों ने भी उनके इस रुख का स्वागत किया है लेकिन सच्चाई यह है कि कानूनी लिहाज़ से अमरीका की परमाणु समझौते में वापसी, ईरान की शर्तों को पूरा किये जाने पर निर्भर है न किसी और की शर्तों को।      ईरान के साथ किया गया परमाणु समझौता कोई खाली घर नहीं है कि जब अमरीका का दिल चाहे घुस जाए और जब चाहे निकल जाए।      सब को पता है कि परमाणु समझौता के मुख्य दो पक्ष, ईरान और अमरीका थे जो ईरानियों और अमरीकियों के बीच लंबी वार्ता के बाद किया गया था। ईरान का प्रतिनिधित्व ईरानी विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ और अमरीका का वहां के विदेशमंत्री जान कैरी कर रहे थे।      परमाणु समझौते के में उपस्थिति अन्य देश और युरोपीय संघ सब के सब परमाणु समझौते में दोनों पक्षों के वचनों के पालन की प्रक्रिया की निगरानी की ज़िम्मेदारी रखते थे और इसी के साथ ईरान ने परमाणु समझौते  को सुरक्षा परिषद में पारित कराने की मां...

‘गोवा में नहीं होगी गोमांस की कमी’ मनोहर पर्रिकर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बीफ की कमी न हो, इससे निपटने के लिए सरकार ने कर्नाटक से इसे आयात करने का विकल्प खुला रखा है। पर्रिकर ने गोवा विधानसभा में कहा, "हमने (कर्नाटक में) बेलगाम से मांस आयात करने का विकल्प बंद नहीं किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां कोई कमी नहीं हो।" पर्रिकर ने यह जवाब भाजपा विधायक नीलेश कबराल के एक सवाल पर दिया। उन्होंने कहा, "मैं आपको भरोसा दे सकता हूं कि पड़ोसी राज्य से आने वाले बीफ की जांच उचित तरीके से और अधिकृत चिकित्सक द्वारा की जाएगी।" पर्रिकर ने यह भी कहा कि यहां से करीब 40 किलोमीटर दूर पोंडा स्थित गोवा मीट कांप्लेक्स में राज्य के एकमात्र वैध बूचड़खाने में रोजाना लगभग 2,000 किलोग्राम बीफ तैयार होता है। उन्होंने कहा, "बाकी के बीफ की आपूर्ति कनार्टक से होती है। सरकार की गोवा मीट कांप्लेक्स में वध के लिए पड़ोसी राज्यों से जानवरों को लाए जाने पर रोक लगाने की कोई मंशा नहीं है।" राज्य के पर्यटन वाले इलाकों में और अल्पसंख्यक समुदाय में बीफ खाया जाता है, जो राज्य की कुल आबा...