Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

آداب فھمِ قرآن - السید علی عمران نقوی

علوم کی حفاظت کے لئے ضبطِ تحریر میں آ کر کتاب کی شکل میں محفوظ ہو جانا نسلِ آدم (ع)  کی تعلیم و تربیت کیلئے لازمی شرط ہے۔ کتاب کو پڑھانے اور سمجھانے کیلئے ایک مدرس یا استاد کی بھی ضرورت ہوتی ہے اس طرح علم آنے والی نسلوں تک پہونچتا ہے۔ لیکن وه کتب جن کے پڑھنے سے ﺫهنِ انسانی کو روشنی ملتی ہے فکر و شعور میں صحت مند مفید تبدیلی آتی ہے ان کتابوں کی تعلیم کے فوائد اپنے مقام پر لیکن ان سب کے ساتھ ساتھ ایک اہم بات یہ بھی ہے کہ اعلیٰ تعلیمی اداروں یعنی یونیورسٹیز میں بڑے بڑے کتب خانے یا لائبریریز بھی بنائی جاتی ہیں جہاں سے ضرورت مند طلبا کو کتابیں فراہم کی جاتی ہیں۔ کتابوں کا پڑھنا پڑھانا اور سمجھنا سمجھانا کس قدر اہم عمل ہے کتنی محنت ریاضت قربانی توجہ چاہتا ہے۔ اس کا اندازه اس بات سے لگائیے کہ صرف لائبریری جہاں کتابوں کو کچھ خاص قواعد و اصول و ضوابط اور ترتیب سے رکھا جاتا ہے اس کام کیلئے باقاعده لائبریری سائنس میں گریجویشن اور پوسٹ گریجویشن سے لیکر ریسرچ تک کرائی جاتی ہے جسکی اس زمانہ میں بڑی مانگ ہوتی جا رہی ہے غور فرمائیے کہ ان عام کتابوں کے رکھنے کیلئے جب ڈگری یافتہ بیچلر آف لائبریری سائنس (B. Lib) اور ماسٹر آف لائبریری سائنس (M. Lib) افراد کو ﺫمہ دار بنایا جاتا ہے کہ وه مقرره اصول و قوانین کے مطابق کتب خانہ کو چلائیں۔ مزکوره صورتِ حال کی روشنی میں سوچئیے کہ تدریسی عمل ایک استاد سے ایک طالبِ علم سے کیا کیا تقاضے کرتا ہوگا۔ اور کسی اہم اور مفید کتاب کی تدریس اور تفہیم کیلئے مقدمہ کے طور سے کیا کیا شرائط ہوں گے کیا یہ ممکن ہے کہ ایک اعلیٰ تعلیم حاصل کرنے والا طالبِ علم اپنے کورس کی دقیق اور اہم کتابوں کی تدریس سے قبل ان تمام شرائط سے باخبر نہ ہو جن کے بغیر اس کتاب کو سمجھا ہی نہیں جا سکتا۔ ماهِ صیام آ رہا ہے نزولِ قرآن کا اور برکتوں کا مہینہ شھر الله یعنی خالقِ کائنات کا مہینہ۔ میں ان جوانوں سے درخواست کروں گا جو قرآن شریف کے ساتھ ساتھ چلنا چاہتے ہیں یہ قرآن شریف اپنے قاری یعنی تلاوت کرنے والے کو خدا وند کریم تک لے جانا چاہتا ہے بشرط یہ کہ نوجوانوں کو یہ علم ہو کہ تلاوتِ قرآن سے قبل مقدمات کے طور سے جوانوں کی ﺫہن سازی کیسے ہو وه کون سی باتیں ہیں جن کے بعد قرآن شریف اپنی تلاوت کرنے والوں کو اتنا بلند کرتا ہے ان مقامات تک لے جاتا ہے کہ بہشت سے بہت آگے وه مراتب اور مقامات ایسے ہیں جن کو مــحـمّــد وآل مــحـمّــد علیہم السلام ہی جانتے ہیں۔ آپ کہیں گے کہ تلاوتِ قرآن شریف سے قبل ہم ان شرائط اور مقدمات کو کہاں سے سیکھیں کیسے جانیں اگر آپ ۱۴۳۷ ہجری  کے ماهِ صیام میں تلاوتِ قرآن شریف کا حق ادا کرنا چاہتے ہیں اور کتابِ خدا کے ساتھ نورانی راہوں پر سفر کرنا چاہتے ہیں تو استادِ معظم علامہ سید جواد نقوی (دام ظلہ الشریف) کی تالیف ( آداب فھمِ قرآن ) کی دونوں جلدوں کا مطالعہ ضرور کیجئیے آپ جاگ جائیں گے۔ ہند و پاک میں اس کتاب کے پڑھے بغیر کم از کم میرے جیسے مبتدی کو قرآن شریف سے فیضیاب ہونا مشکل ہے۔ غیبتِ حضرت ولی عصر عجل الله تعالی فرجہ الشریف میں قرآن و سنّت کی ترویج و اشاعتِ تفھیمِ دین و شریعت کیلئے جس قدر آسان طریقہ محترم موصوف نے اختیار کیا ہے ہند و پاک میں ان کا وجود نعمتِ الٰہی ہے۔
راقم الحروف 
السید علی عمران نقوی 
نوگانواں سادات ہندوستان

Comments

Popular posts from this blog

चुगली,ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना। इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है

ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है। पीठ पीछे बुराई की परिभाषा में कहा गया है पीठ पीछे बुराई करने का मतलब यह है कि किसी की अनुपस्थिति में उसकी बुराई किसी दूसरे इंसान से की जाए कुछ इस तरह से कि अगर वह इंसान ख़ुद सुने तो उसे दुख हो। पैगम्बरे इस्लाम स.अ ने पीठ पीछे बुराई करने की परिभाषा करते हुए कहा है कि पीठ पीछे बुराई करना यह है कि अपने भाई को इस तरह से याद करो जो उसे नापसन्द हो। लोगों ने पूछाः अगर कही गयी बुराई सचमुच उस इंसान में पाई जाती हो तो भी वह ग़ीबत है? तो पैगम्बरे इस्लाम ने फरमाया कि जो तुम उसके बारे में कह रहे हो अगर वह उसमें है तो यह ग़ीबत है और अगर वह बुराई उसमें न हो तो फिर तुमने उस पर आरोप लगाया है।यहां पर यह सवाल उठता है कि इंसान किसी की पीठ पीछे बुराई क्यों करता है?  पीठ पीछे बुराई के कई कारण हो सकते हैं। कभी जलन, पीठ पीछे बुराई का कारण बनती है। जबकि इंसान को किसी दूसरे की स्थिति से ...

म्यांमार: आंग सान सू ची की रोहिंग्या मुसलमानों पर दिए गए बयान से दुनिया भर में आलोचना

म्यांमार की नोबल पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति पर दिए गए उनके बयान के लिए दुनिया भर में आलोचना हो रही है। ग़ौरतलब है कि रोहिंग्या मुसलमानों पर म्यांमार सेना के ताज़ा हमलों में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और 3 लाख से अधिक लोगों ने अपना घरबार छोड़कर बांग्लादेश में शरण ली है। रोहिंग्या संकट पर चुप्पी साधने वाली म्यांमार की नेता सू ची ने पिछले हफ़्ते दावा किया था कि मीडिया में रोहिंग्या मुसलमानों के संकट के बारे में ग़लत रिपोर्टिंग हो रही है। उन्होंने कहा था कि हमारे देश में समस्त लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की जाती है। दुनिया भर में शांति का नोबल पुरस्कार हासिल करने वाली सू ची की इन बयानों को लेकर कड़ी निंदा की जा रही है और मांग की जा रही है कि उनसे शांति का नोबल पुरस्कार वापस लिया जाए। हालांकि दुनिया के सभी नेता आंग सान सू ची का आलोचना में एकमत नहीं हैं। उदाहरण स्वरूप भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल उनकी आलोचना करने से इनकार कर दिया, बल्कि उन्हें समर्थन का आश्वसन दिया है। msm  

फ्रांस में हो रहा है मुसलमानों पर अत्याचार देखें वीडियो वायरल।

 सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें फ्रांस के पुरुष पुलिसकर्मियों के द्वारा एक मुस्लिम महिला के ऊपर अत्याचार करते हुए दिखाया जा रहा है   आप भी वीडियो देखें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें कि किस प्रकार फ्रांस की हकूमत मुसलमानों के साथ अत्याचार कर रही है। नोट- हमे अभी तक इस बात की  पुष्टि नहीं हुई है कि यह वीडियो फ्रांस की है। मगर अगर यह फ्रांस की वीडियो है तो बहुत ही निंदिया है। ट्रंप की हार और जो बिडेन जीते।

बंगाल 24 परगना: हिंदू पड़ोसी की मदद के लिए पैसा बांट रहे मुस्लिम

दंगाग्रस्त बशीरहाट में उम्मीद की कोंपले फूट रही हैं. बांग्लादेश सीमा से लगे उत्तरी 24 परगना के इस इलाके में मुस्लिम लोग अपने हिंदू पड़ोसियों की मदद के लिए पैसा बांट रहे हैं. हफ्ते भर पहले हुई बशीरहाट हिंसा में सौ से ज्यादा दुकानें और मकान क्षतिग्रस्त हो गए. इनमें हिंदुओं की दुकानें और मकानों को काफी क्षति पहुंची है. ये हिंसा सोशल मीडिया पर वायरल हुई आपत्तिजनक पोस्ट के चलते हुई जिसमें इस्लाम और मुस्लिम के बारे में गलत टिप्पणी की गई थी. बशीरहाट की त्रिमुहानी का नजारा कुछ ऐसा है कि पुलिस और सुरक्षा बल के पहरे में खड़े मोहम्मद नूर इस्लाम गाजी और अजय पाल को भीड़ घेरे हुई है. यही पर अजय पाल की पान बीड़ी की दुकान है. मंगलवार को भड़की हिंसा में इस इलाके में खूब बवाल हुआ था. दुकानें लूट ली गई थीं और घरों में तोड़फोड़ हुई. गाजी और कई मुसलमान पाल से अपनी दुकान दोबारा खोलने की गुजारिश कर रहे हैं. साथ ही पाल से 2 हजार रुपये लेने की गुजारिश कर रहे हैं. स्थानीय बिजनेसमैन गाजी ने कहा, 'बाबरी विध्वंस के बाद भी हमारे शहर में शांति रही. मंगलवार को जो हुआ वो ठीक नहीं है. कुछ बाहरी लोग और हमारे स्थ...

एक बार फिर: मुस्लिम समाज बना फरिश्ता - मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा

यूपी के मुजफ्फरनगर में खतौली के पास शनिवार को कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटना की शिकार हो गई। हादसे में 23 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि 40 लोग घायल हुए हैं। भले ही कुछ मिट्ठी भर लोग मुस्लिम समाज को बुरी नज़र से देखते हो पर सत्य यह है के हमेशा देश को बनाने मानवता के लिए हमेशा से सब से आगे खड़ा मिलता है ऐसा ही कुछ  मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा में हुआ ।  नवभारतटाइम्स.कॉम के अनुसार हादसे का शिकार हुई उत्कल एक्सप्रेस के यात्रियों को स्थानीय लोगों की भरपूर मदद मिली। हादसे के बाद रेलवे की टीम के मौके पर पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोग यात्रियों की मदद के लिए पहुंच गए थे और रेस्क्यू टीम के पहुंचने के बाद भी स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव के काम में अपना सहयोग जारी रखा। लोगों ने यात्रियों को न सिर्फ बाहर निकालने में मदद की बल्कि उन्होंने खाना और जरूरत की अन्य चीजें भी यात्रियों को मुहैया कराईं। इमरान अली ने नाम के युवक ने कहा, 'स्थानीय लोगों ने हादसे के पीड़ित यात्रियों की मदद करने की पहल की और रात से ही हम उनकी मदद में जुटे हैं। हमने उन्हें खाना भी खिलाया। किसी ने हमें ...

Purpose OF Azadari- Moharram 2021

 

अज़ादारी ऐ इमाम हुसैन (अ स) के मकसद को समझे

विचार:रियाज़ अब्बास आब्दी   अज़ादारी सिर्फ इमाम हुसैन की याद में मजलिस व मातमदारी का नाम नहीं है बल्कि ज़ालिम तानाशाहों के ज़ुल्मों के खिलाफ आवाज़ उठाने का नाम भी अज़ादारी है  अल्लाह के लिए अपनी दुनियावी आरज़ूओं पर लगाम लगाने का नाम अज़ादारी है  एक दुसरे से किसी को तकलीफ न पहुंचे,किसी का दिल न दुखे यह अज़ादारी है  शहीदे कर्बला के किरदारों, कुर्बानियों, सबर को अपनी ज़िन्दगी में अमलीजामा पहनाने का नाम अज़ादारी है  अपने प्यार अपने किरदार से दुश्मन को भी अपना दोस्त बनाने पर मजबूर कर देने का नाम अज़ादारी है  भूके को खाना खिलाना, प्यासे की प्यास बुझाना, मजलूम का साथ देने का नाम अज़ादारी है   दुनियावी परेशानियों में घिरे होने के बाद भी अल्लाह को न भूलने का नाम अज़ादारी है किसी के हक को दिलाने और देने का नाम नाम अज़ादारी है  ओरतों की इज्ज़त और बच्चों को प्यार करने का नाम अज़ादारी है  दोस्ती निभाना, भाई का भाई के लिए कुर्बानी देने का नाम अज़ादारी है  हक के लिए अपनी जान,मालो दोलत गवाने का नाम अज़ादारी है  यतीमों, मिसकीनों, मुसाफिरों, ज...

घरों में कम होता खुलापन बना रहा बीमार - जरूरी बात

लंदन एजेंसियां :वायु प्रदूषण का खतरा सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं हैं। घरों में घटता खुलापन और आराम देने वाले आधुनिक उपकरणों से पनप रहा अंदरूनी प्रदूषण भी लोगों को बीमार कर रहा है। यह अंदरूनी प्रदूषण श्वसन रोग समेत फेफड़े की कई बीमारियों कारण बन रहा है। ब्रिटिश विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में यह चेतावनी दी है।   अंदरूनी प्रदूषण की अनदेखी : शोधकर्ताओं ने कहा, बाहर के वायु प्रदूषण के खतरों से हम सभी परिचित हैं। यह हर साल ब्रिटेन में 40 हजार और अमेरिका में दो लाख लोगों की असमय मौत का कारण बनता है। लेकिन ज्यादातर लोगों को इसका अंदाजा नहीं है कि छोटे घर के भीतर की प्रदूषित वायु भी स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। घरेलू उपकरणों का असर : उन्होंने कहा, आजकल ज्यादातर घरों में गैस-चूल्हों का इस्तेमाल किया जाता है। घरों की साफ-सफाई के लिए रासायनिक स्वच्छता उत्पादों का प्रयोग होता है। कमरों को गर्म या ठंडा रखने के लिए एयरकंडीशनर का इस्तेमाल भी आम है। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये सारी चीजें घर की अंदरूनी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, जिनका असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है। ...

عزاداری صرف ماتم داری کا نام نہیں ہے بلکہ انسانیت کے پرچم کو بلند کرنے کا نام عزاداری ہے - عظمت عابدی

  आजादारी सिर्फ मातम का नाम नहीं, इंसानियत का झंडा फहराना ही आजादारी है