Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

योगी सरकार - 729 मर्डर, 800 से ज़्यादा रेप 2682 अपहरण

लेखक: समीरात्मज मिश्र
उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद आदित्यनाथ योगी सरकार जिस मुद्दे पर सबसे ज़्यादा नाकाम रहने के आरोप झेल रही है, वह है- कानून व्यववस्था. पिछले दिनों सरकार ने ख़ुद इस बात को स्वीकारा है कि अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं.
विधानसभा में एक सवाल के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सरकार के गठन से लेकर 9 मई तक राज्य में कुल 729 हत्याएं, 803 बलात्कार, 60 डकैती, 799 लूट और 2682 अपहरण की घटनाएं हुई हैं.
हालांकि विपक्षी दल इसी दौरान पिछले सालों में हुए अपराध का तुलनात्मक ब्यौरा चाहते थे लेकिन सरकार के पास वो उपलब्ध नहीं थे. विपक्ष का दावा है कि बीते सालों की तुलना में अपराध में तीस फ़ीसदी से ज़्यादा की बढ़ोत्तरी हुई है.
विधानसभा में बीएसपी के नेता लालजी वर्मा ने आंकड़े देकर यह बताया और समाजवादी पार्टी भी ऐसा ही मानती है.
सपा नेता राजेंद्र चौधरी कहते हैं, ''अखिलेश यादव के समय में देश के 18 राज्यों से ज़्यादा अच्छी कानून व्यवस्था उत्तर प्रदेश में थी. ये नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का आंकड़ा था. ''
सरकार दो महीने में ही अपराध की इतनी बड़ी सूची भले ही पेश कर रही हो लेकिन अपराध के मामले बढ़ने की वजह कुछ ऐसा बता रही है कि विपक्षी दलों का ग़ुस्सा और बढ़ गया है.
ख़ुद मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा कि अपराध बढ़े नहीं हैं बल्कि वो बढ़े हुए इसलिए दिख रहे हैं कि क्योंकि पहले अपराध दर्ज नहीं होते थे, जबकि अब अपराध दर्ज हो रहे हैं.
विधानसभा में ये बात कहते हुए योगी ने सीधे तौर पर बीएसपी और समाजवादी पार्टी की ओर इशारा किया. योगी ने यह भी कहा कि हत्या की घटनाओं में पिछले साल की तुलना में पांच फ़ीसदी की कमी आई है.
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पुलिस और प्रशासन को सरकार इस बारे में निर्देशित करती है कि मामले दर्ज किए जाएं या नहीं.
उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक रह चुके प्रकाश सिंह कहते हैं, ''बिल्कुल ऐसा होता है. यूपी में तो एक मुख्यमंत्री ने बाक़ायदा अफ़सरों को निर्देश दिए थे कि अपराध में सत्तर फ़ीसदी तक कमी आनी चाहिए और अफ़सरों ने कमी लाकर दिखा भी दिया.''
उन्होंने कहा, ''अपराध जादू की छड़ी से नहीं रुकता. ज़ाहिर है, अपराध न दर्ज करके आंकड़ों में इसे कम दिखा दिया.''
हालांकि समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने इस बात से इनकार किया और सीएम योगी के आरोपों पर आपत्ति भी जताई.
जानकारों का कहना है कि सरकार के आंकड़े कुछ भी कहें, लेकिन अपराध की स्थिति किसी से छुपी नहीं है. ऐसा तब है जब ख़ुद राज्यपाल भी इस बाबत नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं.
योगी सरकार

Comments

Popular posts from this blog

4 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via -  Mr Ali Haider

"विश्व अली असग़र दिवस" मोहर्रम की पहली तारीख़ मनाया जाएगा

"अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष 22 सितम्बर शुक्रवार को 41 देशों में एक साथ मनाया जाएगा। "अली असग़र विश्व दिवस" कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था के अध्यक्ष दाऊद मनाफ़ी ने एक प्रेसवार्ता में बताया है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) के 6 महीने के दूध पीते बेटे हज़रत अली असग़र (अ) की याद में आयोजित होने वाले "अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की पहली तारीख़ अर्थात 22 सितम्बर शुक्रवार को ईरान सहित दुनिया के 41 देशों में मनाया जाएगा।   संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि अली असग़र विश्व दिवस के अवसर पर ईरान से छोटे बच्चों के पहनने के लिए तैयार सफ़ेद और हरे रंग के लगभग एक लाख कपड़े दुनिया के 41 देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया हज़रत अली असग़र के नाम से "अली असग़र विश्व दिवस" का आयोजन करने वाली उनकी संस्था ने दुनिया की आठ भाषाओं जिनमें, अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, रूसी, आज़री, तुर्की इस्तांबूली, स्वाहिली और  हौसा भाषा हैं। इस संस्था ने एक किताब भी प्रकाशित की है जिसके द्वारा दुनियाभर के लोगों तक इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ...

عزاداری صرف ماتم داری کا نام نہیں ہے بلکہ انسانیت کے پرچم کو بلند کرنے کا نام عزاداری ہے - عظمت عابدی

  आजादारी सिर्फ मातम का नाम नहीं, इंसानियत का झंडा फहराना ही आजादारी है

ईरान के अज़ादारो के कुछ अनोखे चित्र

Join Us :Live All Over World 's Azadari.Com

तेहरान आतंकी घटना के पीछे सऊदी अरब का हाथ!!!

प्राप्त जानकारी के अनुसार तेहरान हमलों से कुछ देर पहले ही आतंकियों ने मरियम रजवी से भेंट की थी जिस में एक सऊदी अधिकारी ने वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिये भाग लिया । इस भेंट में रियाज़ में रह रहा सीरिया सशस्त्र विद्रोहियों का नेता नस्र हरीरी, जैश ए फतह का आतंकी यासिर अब्दुर रहीम, इस्राईल और जॉर्डन ख़ुफ़िया एजेंसी का एजेंट अबू जौलानी आदि सम्मिलित थे । इस बैठक मे सऊदी अधिकारी ने वीडियो कांफ्रेंस द्वारा सम्बोधित किया । इस मीटिंग में सीरिया से पलट कर गए स्लीपर सेल्स के तेहरान उद्देश्यों के बारे में चर्चा की गयी। रजवी और आतंकी कमांडरों के बीच इस मीटिंग में ईरान और विशेष रूप से इमाम खुमैनी के मज़ार पर हमले के लिए सहयोग को सुनिश्चित करना था । सऊदी अधिकारी द्वारा पूछे गए सवाल कि इन हमलों का फायदा क्या हो सकता है के जवाब में मरियम रजवी ने कहा कि यह हमले इमाम खुमैनी की बरसी पर दिए गए आयतुल्लाह ख़ामेनई के अंतिम भाषण का जवाब होगा ।

रमज़ान में कोशिश करनी चाहिए कि ख़ाना सादा हो

रमज़ान का महीना मुबारक हो  रमज़ान के मुबारक महीने में हमारा भोजन पहले के मुक़ाबले ज़्यादा चेंज नहीं होना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि ख़ाना सादा हो. इसी तरह इफ़तार का सिस्टम इस तरह सेट किया जाना चाहिए कि नैचुरल वज़्न पर कोई ज्यादा असर न पड़े। दिन में लंबी मुद्दत की भूख के बाद ऐसे खाने प्रयोग करें जो देर हज़म हों। देर हजम खाने कम से कम 8 घंटे हाज़मा सिस्टम में बाकी रहते हैं. हालांकि जल्दी हज़्म होने वाले खाने केवल 3 या 4 घंटे पेट में टिक सकते हैं और इंसान बहुत जल्दी भूख महसूस करने लगता है। देर हजम खाने जैसे अनाजः जौ, गेहूँ, बीन्स, दालें, चावल कि जिन्हें "कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट" कहते हैं। भोजन को बललते रहना चाहिए. यानी हर तरह के भोजन का उपयोग किया जाए जैसे फल, सब्जियां, गोश्त, मुर्गी, मछली, रोटी, दूध और अन्य दूध से बनी चीजें। तली हुई चीजें बहुत कम इस्तेमाल की जाएं. इसलिए कि हजम न होने, पेट में जलन पैदा होने और वज़न में बढ़ोतरी का कारण बनती हैं। किन चीजों से बचें? 1: तली हुई और चर्बी दार खानों से 2: ज़्यादा मीठी चीजों से 3: सहर के समय ज़्यादा खाना खाने से 4: सहर क...

चुगली,ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना। इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है

ग़ीबत यानी पीठ पीछे बुराई करना है, ग़ीबत एक ऐसी बुराई है जो इंसान के मन मस्तिष्क को नुक़सान पहुंचाती है और सामाजिक संबंधों के लिए भी ज़हर होती है। पीठ पीछे बुराई करने की इस्लामी शिक्षाओं में बहुत ज़्यादा आलोचना की गयी है। पीठ पीछे बुराई की परिभाषा में कहा गया है पीठ पीछे बुराई करने का मतलब यह है कि किसी की अनुपस्थिति में उसकी बुराई किसी दूसरे इंसान से की जाए कुछ इस तरह से कि अगर वह इंसान ख़ुद सुने तो उसे दुख हो। पैगम्बरे इस्लाम स.अ ने पीठ पीछे बुराई करने की परिभाषा करते हुए कहा है कि पीठ पीछे बुराई करना यह है कि अपने भाई को इस तरह से याद करो जो उसे नापसन्द हो। लोगों ने पूछाः अगर कही गयी बुराई सचमुच उस इंसान में पाई जाती हो तो भी वह ग़ीबत है? तो पैगम्बरे इस्लाम ने फरमाया कि जो तुम उसके बारे में कह रहे हो अगर वह उसमें है तो यह ग़ीबत है और अगर वह बुराई उसमें न हो तो फिर तुमने उस पर आरोप लगाया है।यहां पर यह सवाल उठता है कि इंसान किसी की पीठ पीछे बुराई क्यों करता है?  पीठ पीछे बुराई के कई कारण हो सकते हैं। कभी जलन, पीठ पीछे बुराई का कारण बनती है। जबकि इंसान को किसी दूसरे की स्थिति से ...

3 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via Syed Haider Ali Molai