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घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

मोदी सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों को रोहिंग्या मुसलमानों की एंट्री न होने के लिए दिया निर्देश

मोदी सरकार के रोहिंग्या मुसलमानों पर शिकंजा कसने के साथ केंद्रीय एजेंसियों को भारत में रोहिंग्या के प्रवेश के सभी संभावित रास्तों की पहचान करने और उन पर रोक लगाने के लिए अधिकतम इंतजाम करने को कहा गया है। याद रहे म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के साथ अत्याचार के चलते लोग पलायन कर अपनी जाने बचाने के लिए भारत आते हैं पर मोदी सरकार मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को कोई महत्व नहीं दे रही है  लगता ऐसा है के ट्रम्प को खुश करने के लिए यह सब किया जा रहा है 

म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों की जाच करने वाली टीम को म्यांमार सरकार ने रोका

  म्यांमार में अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों के जारी घातक दमन के बीच इस देश में मानवाधिकार की स्थिति की जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से नियुक्त की गयीं आज़ाद प्रतिवेदक को म्यांमार सरकार ने आने से मना कर दिया है। यूएन की विशेष प्रतिवेदक यांगही ली का जनवरी से ही दक्षिण-पूर्वी देश म्यांमार का दौरा विलंबित होता आया है। वह म्यांमार के पश्चिमी राज्य राख़ीन में रोहिंग्या मुसलमानों के व्यापक स्तर पर हो रहे दमन सहित म्यांमार में मानवाधिकार की स्थिति की समीक्षा करना चाहती हैं। म्यांमार की सरकार ने यांगही ली को दौरा करने से मना कर दिया और उनसे कहा है कि जब तक वे इस पद पर रहेंगी उन्हें म्यांमार आने नहीं दिया जाएगा। यह बात यांगही ली ने बुधवार को अपने एक बयान में कही। उन्होंने कहा कि यह इस बात का चिन्ह है कि राख़ीन राज्य में ज़रुर कुछ भयंकर हुआ है जिसे छिपाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने अपने बयान में कहा, "मुझे सौंपी गयी ज़िम्मेदारी के साथ सहयोग न करने के इस एलान को इस गंभीर चिन्ह के रूप में देखा जाएगा कि राख़ीन सहित इस देश के बाक़ी क्षेत्रों में कुछ भयंकर हो रह...

रोहिंग्य मुसलमानों के नरसंहार के लिए म्यांमार सरकार को दोषी - ह्यूमन राइट्स वॉच

अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने रोहिंग्य मुसलमानों के नरसंहार और उनके ऊपर किए गए मानवता को शर्मसार करने वाले अत्याचारों के लिए म्यांमार सरकार को दोषी ठहराया है। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन राइट्स वॉच ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह म्यांमार पर आर्थिक प्रतिबंधों के साथ-साथ हथियारों के ख़रीदने पर भी प्रतिबंध लगाए।  ह्यूमन राइट्स वॉच के लीगल एंड पॉलिसी डायरेक्टर, जेम्स रोज़  का कहना है कि म्यांमार की सेना राख़ीन प्रांत से रोहिंग्या मुसलमानों को ज़बरदस्ती निकाल रही है। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र संघ के शरणार्थियों के मामलों के विभाग ने कहा है कि 4 लाख 80 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान, जो शरणार्थी शिवरों में रह रहे हैं, उनके लिए खाद्य व अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए दोगुने बजट की आवश्कता है। इस बीच म्यांमार सरकार के प्रवक्ता ने ह्यूमन राइट्स वॉच के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि जिससे यह साबित हो कि म्यांमार सरकार मानवता विरोधी कार्यवाहियों में शामिल है। उल्लेखनीय है कि  संयुक्त राष...

अज़ादारी ऐ इमाम हुसैन (अ स) के मकसद को समझे

विचार:रियाज़ अब्बास आब्दी   अज़ादारी सिर्फ इमाम हुसैन की याद में मजलिस व मातमदारी का नाम नहीं है बल्कि ज़ालिम तानाशाहों के ज़ुल्मों के खिलाफ आवाज़ उठाने का नाम भी अज़ादारी है  अल्लाह के लिए अपनी दुनियावी आरज़ूओं पर लगाम लगाने का नाम अज़ादारी है  एक दुसरे से किसी को तकलीफ न पहुंचे,किसी का दिल न दुखे यह अज़ादारी है  शहीदे कर्बला के किरदारों, कुर्बानियों, सबर को अपनी ज़िन्दगी में अमलीजामा पहनाने का नाम अज़ादारी है  अपने प्यार अपने किरदार से दुश्मन को भी अपना दोस्त बनाने पर मजबूर कर देने का नाम अज़ादारी है  भूके को खाना खिलाना, प्यासे की प्यास बुझाना, मजलूम का साथ देने का नाम अज़ादारी है   दुनियावी परेशानियों में घिरे होने के बाद भी अल्लाह को न भूलने का नाम अज़ादारी है किसी के हक को दिलाने और देने का नाम नाम अज़ादारी है  ओरतों की इज्ज़त और बच्चों को प्यार करने का नाम अज़ादारी है  दोस्ती निभाना, भाई का भाई के लिए कुर्बानी देने का नाम अज़ादारी है  हक के लिए अपनी जान,मालो दोलत गवाने का नाम अज़ादारी है  यतीमों, मिसकीनों, मुसाफिरों, ज...

मुहर्रम की तैयारियां में जुटे “महफ़ूज़ ऐ अज़ादारी” के रजाकार - नौगावां सादात

पिछले दो दिनों से नौगावां सादात में “महफ़ूज़ ऐ अज़ादारी” के रजाकारों ने आमदे आयामें अज़ा के लिए तैयारियो में जुटे हैं एवं “महफ़ूज़ ऐ अज़ादारी” की ओर से तहसील नौगावां सादात के SDM को  ज्ञापन दे कर  मुहर्रम में होने वाले कार्यकर्मों में सुरक्षा की मांग की है एवं “महफ़ूज़ ऐ अज़ादारी” के द्वारा किए जाने वाले कार्यकलापों से  अवगत कराया है  फोटो रिपोर्ट देखें -  

"विश्व अली असग़र दिवस" मोहर्रम की पहली तारीख़ मनाया जाएगा

"अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष 22 सितम्बर शुक्रवार को 41 देशों में एक साथ मनाया जाएगा। "अली असग़र विश्व दिवस" कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था के अध्यक्ष दाऊद मनाफ़ी ने एक प्रेसवार्ता में बताया है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) के 6 महीने के दूध पीते बेटे हज़रत अली असग़र (अ) की याद में आयोजित होने वाले "अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की पहली तारीख़ अर्थात 22 सितम्बर शुक्रवार को ईरान सहित दुनिया के 41 देशों में मनाया जाएगा।   संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि अली असग़र विश्व दिवस के अवसर पर ईरान से छोटे बच्चों के पहनने के लिए तैयार सफ़ेद और हरे रंग के लगभग एक लाख कपड़े दुनिया के 41 देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया हज़रत अली असग़र के नाम से "अली असग़र विश्व दिवस" का आयोजन करने वाली उनकी संस्था ने दुनिया की आठ भाषाओं जिनमें, अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, रूसी, आज़री, तुर्की इस्तांबूली, स्वाहिली और  हौसा भाषा हैं। इस संस्था ने एक किताब भी प्रकाशित की है जिसके द्वारा दुनियाभर के लोगों तक इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ...

इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में दूसरा इस्राईल, कुर्दों ने लहराया इस्राईली झंडा

इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र में जनमत संग्रह का समर्थन करने वालों ने हाथों में इस्राईल का ध्वज लेकर प्रदर्शन किया है। इराक़ से अलग होने का समर्थन करने वाले कुर्दों ने हाथों में इस्राईली झंडे उठाकर इराक़ के पूर्व प्रधान मंत्री नूरी अलमालेकी की उस बात को सही साबित कर दिया है कि इलाक़े में एक और इस्राईल बनाए जाने की साज़िश रची जा रही है। इराक़ के पूर्व प्रधान मंत्री एवं उप राष्ट्रपति नूरी अलमालेकी ने कुर्दिस्तान को इराक़ से अलग करने कि लिए आयोजित कराए जाने वाले जनमत संग्रह का विरोध करते हुए कहा है कि हम इलाक़े में एक और इस्राईल नहीं बनने देंगे। क्षेत्रीय देशों एवं विश्व समुदाय के विरोध के बावजूद, इस्राईल कुर्दिस्तान को इराक़ से अलग करने का सबसे अधिक समर्थन कर रहा है। कुर्दिस्तान के प्रमुख मसूद बारेज़ानी ने न केवल कुर्दिस्तान क्षेत्र में जनमत संग्रह के आयोजन का एलान किया है, बल्कि तेल से समृद्ध इराक़ के किरकूक प्रांत में भी जनमत संग्रह आयोजित कराने की बात कही है। हाल ही में बारेज़ानी ने दाइश का सफ़ाया करने में अहम भूमिका निभाने वाले स्वयं सेवी बल हश्दुश्शाबी को कुर्दों ...