Skip to main content

घबराओ नहीं[जरुर पढे]

युद्ध में हार या जीत का असली मानक हसन नसरुल्ला, हिज़्बुल्लाह के नेता, की शहादत ने एक नई बहस छेड़ दी है कि युद्ध में असली जीत और हार का क्या मानक है। उनकी शहादत एक बड़ा नुकसान है, लेकिन जिस सिद्धांत और उद्देश्य के लिए उन्होंने संघर्ष किया, वह आज भी जीवित है। उनका जीवन और बलिदान इस बात का प्रतीक है कि जब किसी कौम के पास एक मजबूत सिद्धांत होता है, तो वह अपने अस्तित्व के लिए लड़ती रहती है। युद्धों का इतिहास हमें सिखाता है कि हार और जीत का निर्णय हमेशा युद्ध के मैदान में लड़ने वालों की संख्या या शहीदों की संख्या पर नहीं होता, बल्कि उस उद्देश्य की सफलता पर होता है जिसके लिए युद्ध लड़ा गया। यही उद्देश्य है जो जातियों को प्रेरित करता है और उन्हें लड़ने के कारण प्रदान करता है। जब भी कोई कौम युद्ध की शुरुआत करती है, वह एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होती है। यह उद्देश्य कुछ भी हो सकता है: स्वतंत्रता, आत्मनिर्णय, राष्ट्रीय सुरक्षा, या किसी सिद्धांत का संरक्षण। युद्ध में भाग लेने वाले लोग विश्वास करते हैं कि वे किसी बड़े कारण के लिए लड़ रहे हैं। यदि यह उद्देश्य पूरा होता है, तो इसे सफलता माना जाता ...

मुस्लिम परिवार से एक बर फिर पैसेंजर ट्रेन में मारपीट


लेखक :पंडित असगर 
जुनैद की मौत का मामला अभी थमा नहीं था कि एक और हिंसक मामला सामने आ गया. इस बार एक ही फैमिली के 11 लोगों को बुरी तरह से पीटा गया है. औरतों को सेक्शुअली हैरेस करने की भी बात सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि सिर्फ मारा ही नहीं, बल्कि झगड़े के बाद बुलाई गई भीड़ मुस्लिम परिवार का सामान भी लूट कर ले गई. पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है. यह मामला उत्तर प्रदेश में मैनपुरी का है

53 साल के शाकिर अपनी फैमिली के साथ फर्रुखाबाद-शिकोहाबाद पैसेंजर ट्रेन में सफ़र कर रहे थे. कस्बा भोगांव में एक शादी में शामिल होकर वापस फर्रुखाबाद जाने के लिए भोगांव रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन की बोगी में सवार हुए थे.

जैसे ही ट्रेन पखना स्टेशन से आगे बढ़ी, तभी यहां से कुछ लोग ट्रेन में चढ़े और महिलाओं के साथ छेड़खानी शुरू कर दी. जब इस छेड़छाड़ का विरोध किया तो शाकिर के परिवार और उन लोगों के बीच बहस होने लगी. उन लोगों ने फोन करके अपने साथियों को बुला लिया और परिवार से मारपीट शुरू कर दी.

औरतों को भी ज़ख़्मी कर दिया गया. लूटमार करने के बाद हमलावर नीमकरोरी स्टेशन के पास ट्रेन की चेन पुलिंग करके भाग गए. इस घटना के बाद जब ट्रेन फर्रुखाबाद जंक्शन पर आकर रुकी तो जीआरपी को घटना की जानकारी मिली.

फर्रुखाबाद जीआरपी के दरोगा राजकुमार शर्मा का कहना है कि भोगांव से एक परिवार पैसेंजर ट्रेन में चढ़ा. इसी ट्रेन में यहां से कुछ लड़के भी सवार हुए. किसी लड़के की महिला से कोहनी वगैरहा लग गई. इस बात को लेकर ही झगड़ा हुआ. जब ट्रेन चलने लगी तो लड़कों ने अपने गांव नगला मोती में फोन करके अपने साथियों को बुला लिया. जब लड़के आए तो परिवार के लोगों ने ट्रेन का दरवाजा नहीं खोला.

UP : A Muslim family was brutally assaulted and looted by a gang in a train in Mainpuri
इसपर लड़कों ने ट्रेन की खिड़की का शीशा तोड़ दिया और अंदर घुस आए. लड़कों ने इनके साथ मारपीट और लूटपाट की.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक शाकिर ने बताया,
‘हमपर रॉड से हमला किया गया. उन लोगों ने न सिर्फ हमें लूटा बल्कि औरतों के साथ बदतमीजी भी की. वो हमें मारे जा रहे थे. उन्होंने मानसिक तौर पर कमज़ोर मेरे 17 साल के बेटे पर भी रहम नहीं खाया.’
शाकिर फर्रुखाबाद जिले के कासगंज के रहने वाले हैं. उन्होंने मीडिया को अपने सिर में आई चोटें दिखाईं. और टूटा हुआ हाथ दिखाया.

एसपी ओपी सिंह के मुताबिक, ‘मारपीट में शाकिर के अलावा उनकी पत्नी आसिया, बेटी अर्शी, तीन बेटे अरासान, फैजान, फिज़ू, शाकिर के भाई आरिफ, उनके भतीजे, शाकिर के साले शहीद और उनकी दो बहनें शहनाज़ और मेनाज़ ज़ख़्मी हुए हैं. इनमें चार के सिर में चोट आई है. चार के हाथ में फ्रैक्चर हुआ है. इन 11 के पेट में भी चोटें आई हैं.’ मामले की जांच की जा रही है तीन लोगों को पकड़ लिया गया है.



द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक ही शाकिर का कहना है,



‘हमलावर चिल्ला रहे थे. मुल्ले हैं. मारों इन्हें. और जब वो भागे तो महिला के गले से चैन भी खींच ले गए. कुछ यात्रियों ने हमें बचाने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने उनपर भी हमला किया तो वो पीछे हट गए.’
फर्रुखाबाद स्टेशन पर पहुंचने के बाद जीआरपी ने उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट कराया. बताया जा रहा है कि हमला करने वाले लोगों की संख्या तकरीबन 30 थी. 
 हमले में ज़ख़्मी लड़का. फोटो फेसबुक पर वायरल हो रही हैं.

Comments

Popular posts from this blog

"विश्व अली असग़र दिवस" मोहर्रम की पहली तारीख़ मनाया जाएगा

"अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष 22 सितम्बर शुक्रवार को 41 देशों में एक साथ मनाया जाएगा। "अली असग़र विश्व दिवस" कार्यक्रम का आयोजन करने वाली संस्था के अध्यक्ष दाऊद मनाफ़ी ने एक प्रेसवार्ता में बताया है कि हज़रत इमाम हुसैन (अ) के 6 महीने के दूध पीते बेटे हज़रत अली असग़र (अ) की याद में आयोजित होने वाले "अली असग़र विश्व दिवस" इस वर्ष इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रम की पहली तारीख़ अर्थात 22 सितम्बर शुक्रवार को ईरान सहित दुनिया के 41 देशों में मनाया जाएगा।   संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि अली असग़र विश्व दिवस के अवसर पर ईरान से छोटे बच्चों के पहनने के लिए तैयार सफ़ेद और हरे रंग के लगभग एक लाख कपड़े दुनिया के 41 देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया हज़रत अली असग़र के नाम से "अली असग़र विश्व दिवस" का आयोजन करने वाली उनकी संस्था ने दुनिया की आठ भाषाओं जिनमें, अरबी, उर्दू, अंग्रेज़ी, रूसी, आज़री, तुर्की इस्तांबूली, स्वाहिली और  हौसा भाषा हैं। इस संस्था ने एक किताब भी प्रकाशित की है जिसके द्वारा दुनियाभर के लोगों तक इमाम हुसैन (अ) और हज़रत ...

4 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via -  Mr Ali Haider

3 मोहर्रम जालूस के चित्र - नौगावां सादत अज़ादारी

Photo Via Syed Haider Ali Molai

अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का अपमान करना जायज़ नहीं है - शिया सुन्नी एकता

वैसे तो इस्लाम हर धर्म का आदर करने का आदेश देता है  किसी दुसरे धर्मों (ग़ैर इस्लामी) के प्रतीकों का अपमान करना भी  इस्लाम में वर्विज (मना) है पर कुछ लोग एक दुसरे (अपने इस्लाम) के फिरके के लोगों का अपमान करने की सोचते हैं जो की यह इस्लामी शिक्षा के विपरीत है। दरअसल ऐसे लोग इस्लाम के दुश्मन होते हैं जो इस्लाम के दुश्मनों के हाथ मजबूत करते हैं। अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है और जाहिर है कि जो कोई भी शिया के नाम पर अहले सुन्नत के मुक़द्देसात का अपमान करता है चाहे वो  सुन्नी  होकर शिया मुक़द्देसात का अपमान करता है वह इस्लाम का दुश्मन है। क्या अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों) का  अपमान जैसे खुलुफा  और अहले सुन्नत के कुछ मनपसंद सहाबा  के नाम अशोभनीय तरीके से लेना   जायज़ (वेध) है? दुनिया भर के  शिया धार्मिक केन्द्रों (ईरान और इराक) के ओलामाओ (विद्वानों)  ने फतवा दिया है की अहले सुन्नत के मुक़द्देसात (प्रतीकों)  का  अपमान करना हराम है अधिक जानकारी के लिए मैं यहाँ 1...

عزاداری صرف ماتم داری کا نام نہیں ہے بلکہ انسانیت کے پرچم کو بلند کرنے کا نام عزاداری ہے - عظمت عابدی

  आजादारी सिर्फ मातम का नाम नहीं, इंसानियत का झंडा फहराना ही आजादारी है

ईरान के अज़ादारो के कुछ अनोखे चित्र

Join Us :Live All Over World 's Azadari.Com

‘गोवा में नहीं होगी गोमांस की कमी’ मनोहर पर्रिकर

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंगलवार को कहा कि राज्य में बीफ की कमी न हो, इससे निपटने के लिए सरकार ने कर्नाटक से इसे आयात करने का विकल्प खुला रखा है। पर्रिकर ने गोवा विधानसभा में कहा, "हमने (कर्नाटक में) बेलगाम से मांस आयात करने का विकल्प बंद नहीं किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां कोई कमी नहीं हो।" पर्रिकर ने यह जवाब भाजपा विधायक नीलेश कबराल के एक सवाल पर दिया। उन्होंने कहा, "मैं आपको भरोसा दे सकता हूं कि पड़ोसी राज्य से आने वाले बीफ की जांच उचित तरीके से और अधिकृत चिकित्सक द्वारा की जाएगी।" पर्रिकर ने यह भी कहा कि यहां से करीब 40 किलोमीटर दूर पोंडा स्थित गोवा मीट कांप्लेक्स में राज्य के एकमात्र वैध बूचड़खाने में रोजाना लगभग 2,000 किलोग्राम बीफ तैयार होता है। उन्होंने कहा, "बाकी के बीफ की आपूर्ति कनार्टक से होती है। सरकार की गोवा मीट कांप्लेक्स में वध के लिए पड़ोसी राज्यों से जानवरों को लाए जाने पर रोक लगाने की कोई मंशा नहीं है।" राज्य के पर्यटन वाले इलाकों में और अल्पसंख्यक समुदाय में बीफ खाया जाता है, जो राज्य की कुल आबा...

शहादत : हज़रत इमाम बाकिर और इस्लाम मे सिक्के की ईजाद

 हज़रत इमाम मौहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम पहली रजब 57 हिजरी को जुमा के दिन मदीनाऐ मुनव्वरा मे पैदा हुऐ। अल्लामा मजलिसी लिखते है कि जब आप बत्ने मादर मे तशरीफ लाऐ तो आबाओ अजदाद की तरह घर मे गैब की आवाज़े आने लगी और जब नो महीने पूरे हुऐ तो फरीश्तो की बेइंतेहा आवाज़े आने लगी और शबे विलादत एक नूर जाहिर हुआ और आपने विलादत के बाद आसमान का रूख किया और (हजरत आदम की तरह) तीन बार छींके और खुदा की हम्द बजा लाऐ, पूरे एक दिन और रात आपके हाथ से नूर निकलता रहा। आप खतना शुदा, नाफ बुरीदा और तमाम गंदगीयो से पाक पैदा हुऐ। (जिलाउल उयून पेज न. 259-260) नाम, लक़ब और कुन्नीयत सरवरे कायनात रसूले खुदा (स.अ.व.व) और लोहे महफूज़ के मुताबिक आपका नाम मौहम्मद था और आपकी कुन्नीयत अबुजाफर थी और आपके बहुत सारे लक़ब थे कि जिन मे बाक़िर, शाकिर, हादी ज़्यादा मशहूर है। (शवाहेदुन नबुवत पेज न. 181) लक़बे बाक़िर की वजह बाक़िर बकरः से निकला है और इसका मतलब फैलाने वाला या शक़ करने देने वाला है। (अलमुनजिद पेज न. 41) इमाम बाक़िर को बाक़िर इस लिऐ कहा जाता है कि आपने उलूम को लोगो के सामने पेश किया और...